पिछले कुछ दिनों से राजनेता
से लेकर कई कथा वाचक जैसे देवकीनंदन, रामभद्राचार्य आदि बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख
खान पर अलग-अलग सभाओं, मीडिया बाइट्स देने के दौरान भड़कते नजर आए। वे उन्हें ‘गद्दार’
से लेकर कई तरह के अपमानजनक उपमाओं से नवाज़ रहे हैं। ऐसा कहने के पीछे उनके पास
कोई ठोस आधार नहीं है। उनको भड़काने का काम कई मीडिया चैनल से लेकर न्यूज एजेंसी कर
रही है। ये भड़कने-भड़काने का खेल शाहरुख खान के किसी फ़िल्म को लेकर नहीं था बल्कि
शाहरुख खान की मालिकता वाली टीम ‘कोलकाता नाइट राइडर्स’ (जिसमें उनकी 55%
हिस्सेदारी है, बाकी के 45% हिस्सेदारी मेहता ग्रुप के पास है) में बांग्लादेश के
खिलाड़ी ‘मुस्ताफिजुर रहमान’ को आईपीएल सीज़न 2026 में अपनी टीम की ओर से खेलने के
लिए 9.20 करोड़ में खरीदने के कारण था।
हालांकि
यह पहला मौका नहीं था जब बांग्लादेशी क्रिकेटर्स को किसी टीम ने खरीदा था। जिस
खिलाड़ी को लेकर विवाद शुरू हुआ है वह इससे पूर्व 2016 में सनराइजर्स हैदराबाद, मुंबई
इंडियन्स (2018) और दिल्ली कैपिटल्स (2022, 2023 एवं 2025) चेन्नई सुपर किंग्स (2024)
जैसे टीम के साथ भी इससे पूर्व जुड़े रहे हैं। सवाल यह उठता है कि पिछले कुछ दिनों ऐसा
क्या हुआ कि अचानक से यह विरोध ट्रेंड करने लगा, मीडिया इसे प्रमुखता देने लगी? आइए
इसे समझने का प्रयास करते हैं।
दिनांक 16 दिसंबर 2025
को आईपीएल 2026 के लिए देश विदेश के क्रिकेट खिलाड़ियों की नीलामी
होती है। जिसमें शाहरुख खान की टीम द्वारा बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्तफिजूर रहमान को
खरीदा जाता है। इसके 2 दिन बाद बांग्लादेश में 18 दिसंबर 2025 को कुछ कट्टरपंथियों
द्वारा एक हिंदू व्यक्ति दीपू दास की हत्या कर दी जाती है। इस घटना से बांग्लादेश
के प्रति भारत के लोगों का आक्रोश बढ़ जाता है। इस घटना का निष्पक्ष अवलोकन करें तो
सवाल यह बनता है कि इसमें शाहरुख खान की क्या गलती? पहली बात तो ये है कि मुस्तफिजुर
रहमान की नीलामी दीपू दास की हत्या के 2 दिन पूर्व हो चुकी
थी। यानी भारतीय लोगों की भावनाएँ भड़कने के 2 दिन पूर्व ही इसकी नीलामी हो चुकी थी।
दूसरी बात - खिलाड़ियों को नीलामी में शामिल करने का फैसला आईपीएल को आयोजित करने
वाले समिति का था। ऐसे में यदि किसी देश के खिलाड़ी को नीलामी की प्रक्रिया में
शामिल किया जाता है तो इसके लिए उत्तरदायी आईपीएल आयोजित करने वाली समिति है। न कि
किसी टीम का मालिक।
ऐसे
में सवाल उठता है कि किसी देश के खिलाड़ी को किसी क्रिकेट टूर्नामेंट के खेलाने के
लिए ये बीसीसीआई या आप आईपीएल आयोजन समिति का विरोध क्यों नहीं करते? क्या यह
अज्ञानता में ऐसा कर रहे हैं? या कोई सोची-समझी साजिश के तहत ऐसा किया जा रहा है। मेरा
मानना है कि बांग्लादेशी खिलाड़ी विवाद को फालतू मुद्दा बनाने, और बढ़ावा देने के पीछे संगीत सोम, देवकीनंदन, रामभद्राचार्य
से लेकर NDTV जैसे घटिया चैनल की सोची समझी साजिश है। मैं यह
बात कोई हवा हवाई नहीं कर रहा हूँ, बल्कि इसके पीछे कुछ आधार हैं। पिछले 10 दिन के
घटनाक्रम का अवलोकन करें तो पाते हैं कि जो कुछ भी देश भर में घटित हुआ है वह
बीजेपी के लिए कलंक की तरह है। इस विमर्श में जो भी राजनेता से लेकर कथावाचक शामिल
रहे हैं वे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी के एजेंडे को ही आगे बढ़ा रहे
होते हैं।
अब
पिछले 2-3 सप्ताह की घटनाओं का अवलोकन करते हैं।
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उन्नाव रेप कांड में दिल्ली
हाई कोर्ट द्वारा सजा प्राप्त पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर की सजा का निलंबन।
इस दौरान बीजेपी समर्थित नेताओं/लोगों द्वारा कुलदीप सेंगर का पक्ष लेना (जिससे
क्रुद्ध होकर देश की जनता ने बीजेपी को target करते हुए
खूब खरी खोटी सुनाई)।
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अंकिता भंडारी मर्डर में
बीजेपी नेता का नाम आना,
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बीजेपी शासित उत्तराखंड राज्य
की राजधानी देहरादून में नार्थ ईस्ट के student का
मर्डर कांड,
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क्रिसमस के अवसर पर बीजेपी
समर्थित संगठनों की गुंडागर्दी और उसपर बीजेपी नेताओं की चुप्पी,
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इंदौर में दूषित जल से हुई
मृत्यु पर बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय द्वारा एक पत्रकार को अपशब्द कहा जाना।
ये घटनाएं बीजेपी के
लिए अभिशाप बन रही थी। सोशल मीडिया पर बीजेपी की खूब आलोचना हो रही थी। ऐसे में
विमर्श को भटकाने के लिए ये नया शिगूफा छोड़ा गया है। ताकि विमर्श का मुद्दा बदल
जाए साथ ही बंगाल चुनाव तक हिंदू मुसलमान मुद्दा जीवित रह सके।