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Saturday, 6 December 2025

पांच दिवसीय नवीन पाठ्यपुस्तक उन्मुखीकरण कार्यशाला का समापन

 शासकीय माध्यमिक शाला खिलोरा (बेमेतरा) में दिनाँक 2 से 6 दिसंबर 2025 तक पूर्व माध्यमिक शाला के शिक्षकों के लिए नवीन पाठक पुस्तक उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। इस पांचदिवसीय कार्यशाला में बेमेतरा विकासखंड के पूर्व माध्यमिक शालाओं के 200 से अधिक शिक्षकों को वर्ष 2025 में लाए गए विज्ञान (जिज्ञासा), सामाजिक विज्ञान (समाज का अध्ययन), अंग्रेजी (पूर्वी), संस्कृत (दीपकम) विषय के नवीन पाठ्यपुस्तकों का उन्मुखीकरण किया गया। इन विषयों के अतिरिक्त नए जोड़े गए पाठ्यपुस्तक जैसे - खेल एवं योगशिक्षा (खेल यात्रा), कला शिक्षा (कृति 1), व्यावसायिक शिक्षा (कौशल बोध) से भी शिक्षकों को परिचित कराया गया।

शासकीय माध्यमिक शाला, खिलोरा के चार अलग-अलग कमरों में आयोजित इस कार्यशाला में सभी शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के मुख्य प्रावधनों से परिचित कराते हुए इसके क्रियान्वयन हेतु बनाए गए दस्तावेज राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-SE) 2023 से परिचित कराया गया। तत्पश्चात इसमें उल्लेखित सामाजिक विज्ञान, विज्ञान, अंग्रेजी, संस्कृत आदि विषयों को पढ़ाने के उद्देश्य, पाठचर्या के लक्ष्य, शिक्षण विधि, इस हेतु प्रयुक्त किए जाने वाले शिक्षण सहायक सामग्री, संबंधित सीखने के प्रतिफल, आदि को गतिविधियों के माध्यम से करके बताया गया। शिक्षकों को प्रत्येक विषय का अध्याय वार डेमो कराकर विषय पर गहराई से समझ विकसित करने का प्रयास किया गया।

इन पांच दिनों के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के एक प्रमुख लक्ष्य – ‘बच्चों को 21 वीं सदी के नागरिक के रूप में विकसित करने’ को प्राप्त करने के लिए उपयुक्त गतिविधियों पर समझ विकसित किया गया। इन बिंदुओं पर चर्चा केंद्रित रही -

·       कक्षा में अलग-अलग विषय वस्तु पर छोटे-छोटे प्रोजेक्ट देकर बच्चों को स्वयं से समझ के साथ किसी अवधारणा को सीखने के किस प्रकार मौके दिए जा सकते हैं?

·       सीखने की प्रक्रिया में रोचकता लाने के लिए अलग अलग प्रकार की विधियों जैसे - टीएलएम के प्रयोग, रोल प्ले, वाद-विवाद, बातचीत के मौके देकर उनमें आलोचनात्मक चिंतन इसका कौशल लाया जाए?

·       बच्चों के सीखने में शिक्षकों के साथ-साथ समुदाय के विषय विशेषज्ञ की एक स्रोत व्यक्ति के रूप में किस प्रकार सेवाएं लिया जा सकता है?

·       अलग-अलग अवधारणाओं पर समझ बनाने में कक्षा का प्रिंट समृद्ध माहौल किस प्रकार सहायक है?

·       प्रत्येक पाठ शिक्षण के दौरान किन अलग अलग प्रकार के शिक्षण विधियों का प्रयोग किया जा सकता है?

कार्यशाला के समापन पर पांचवें दिन BEO- Bemetara, BRC – Bemetara एवं DIET, Bemetara के faculty शिक्षकों का उत्साहवर्धन करने हेतु शामिल हुए। सभी शिक्षकों को सक्रिय सहभागिता हेतु सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया। चारों विषय के कुल 12 मास्टर ट्रेनर ने सत्र को संचालित किया। इस कार्यशाला में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, बेमेतरा के तीन सदस्य नेहा (विज्ञान) श्रेया (अंग्रेजी) एवं साकेत (सामाजिक विज्ञान) विषय में शामिल हुए।


Wednesday, 6 August 2025

पाठ्यपुस्तक समीक्षा : हमारा अद्भुत संसार, कक्षा : तीन

 

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अकादमिक सत्र 2025 में पूर्व से अध्ययन/अध्यापन कराए जा रहे ‘पर्यावरण अध्ययन’ विषय को एक नए कलेवर, एक नए नाम ‘हमारा अद्भुत संसार’ के साथ लाया गया है। बच्चों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए उन्हें 21 वीं सदी के कौशलों से युक्त एक वैश्विक नागरिक के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य करते हुए एनसीईआरटी, दिल्ली द्वारा इस पाठ्यपुस्तक को विकसित किया गया है। एससीईआरटी, रायपुर ने इस पाठ्यपुस्तक में छत्तीसगढ़ के संस्कृति एवं संदर्भ को समाहित करते हुए थोड़े बहुत परिवर्तन के साथ प्रकाशित किया है। पर्यावरण के प्रति बच्चों की संवेदनशीलता को विकसित करने के उद्देश्य से बुनियादी स्तर एवं मध्य स्तर की कड़ी के रूप में इस पाठ्यपुस्तक को प्रकाशित किया गया है।

पाठ्यपुस्तक को चार इकाइयों में विभाजित किया गया है जिसके अंतर्गत तीन छोटे-छोटे अध्याय हैं -

इकाई

नाम

अध्याय

 

1

 

हमारे परिवार और समुदाय

अध्याय 1 - मेरा परिवार और मित्र

अध्याय 2 - मेले में हम

अध्याय 3 - त्योहार मनाएँ एक साथ

 

2

 

जीवन आसपास

अध्याय 4 - कुछ खोज पेड़ पौधों की

अध्याय 5 - पेड़ पौधे और पशु पक्षी हैं साथ

अध्याय 6 - निर्भरता एक दूसरे पर

 

3

 

प्रकृति के उपहार

अध्याय 7 - पानी है अनमोल

अध्याय 8 - हमारा भोजन

अध्याय 9 - स्वस्थ रहो प्रसन्न रहो

 

4

 

आस पास है क्या क्या?

अध्याय 10 - वस्तुओं की दुनिया

अध्याय 11 - कैसे बनी ये वस्तुएँ

अध्याय 12 - क्या और कैसे करें इसका?

 

पहले इकाई (हमारा परिवार और समुदाय) का पहला अध्याय ‘मेरा परिवार और मित्र’ है जो बच्चों को एक परिवार के विभिन्न सदस्य, मित्र, पड़ोसी व इन सभी के बीच के संबंध, परस्पर सहयोग को क्रमबद्ध रूप से परिचित कराता है। साथ ही यह अध्याय बड़ा परिवार, छोटा परिवार से परिचित कराने के साथ-साथ मानव-मानव के बीच के रिश्ते से आगे ले जाते हुए बच्चों को इस ज्ञान से परिचित कराता है कि मानव-जीव जन्तु, मानव-पेड़ पौधे के बीच भी रिश्ते होते हैं जो काफी प्रेम से निभाए भी जाते हैं। दूसरा अध्याय हमारे पास के और दूर के रिश्तेदारों के बीच के परस्पर सहयोगी संबंध से बच्चों को परिचित कराता है। तीसरे अध्याय में देश के दो राज्यों जम्मू एवं झारखंड में वसंत ऋतु को अलग-अलग नाम से मनाए जाने का जिक्र करते हुए विभिन्न प्रकार के व्यंजन एवं संस्कृति से परिचित कराते हुए त्योहारों को मिलजुल कर मनाने का संदेश दिया गया है। साथ ही सुरक्षित यात्रा करने हेतु आवश्यक नियमों, चौड़ी पक्की सड़क, संकरी कच्ची सड़क से भी परिचित कराया गया है।  

दूसरा इकाई ‘जीवन आसपास’ हमारे आसपास के जीवन से संबंधित है, जो तीन अध्यायों में विभाजित है। इसका पहला अध्याय ‘कुछ खोज पेड़ पौधों की’ है। यह अध्याय बच्चों को हमारे आस पास उगने वाले विभिन्न प्रकार के पेड़ पौधों, उनके भौतिक विशेषताओं, एवं महत्त्व से परिचित कराता है। इस इकाई का दूसरा अध्याय ‘पेड़ पौधे और पशु पक्षी हैं साथ’ है। पौधों तथा जानवरों के बीच के परस्पर संबंध से परिचित कराता यह अध्याय बच्चों को उनकी आवास एवं व्यवहार से संबंधित ज्ञान देता है। तीसरा अध्याय ‘निर्भरता एक दूसरे पर’ है जो यह दिखाता है कि हम पौधों तथा जानवरों के साथ किस प्रकार जुड़े हैं।  

तीसरा इकाई ‘प्रकृति के उपहार’ है इसके अंतर्गत भोजन और पानी के संबंध में चर्चा किया गया है। इस इकाई का पहला अध्याय ‘पानी है अनमोल’ है जो इस बात पर केंद्रित है कि किस प्रकार बारिश हमें पानी जैसे अनमोल उपहार प्रदान करती है। यह अनमोल उपहार हमें किन किन स्रोतों से प्राप्त होता है? किस प्रकार हम इस अनमोल उपहार का प्रभावी तरीके से उपयोग करते हुए इसका संरक्षण कर सकते हैं। दूसरा अध्याय है ‘हमारा भोजन’ इसके अंतर्गत विभिन्न स्रोतों से प्राप्त होने वाले खाद्य पदार्थ एवं इससे प्राप्त होने वाले लाभकारी पोषक तत्व के संबंध में बच्चों को बताया गया है। तीसरा अध्याय ‘स्वस्थ रहो प्रसन्न रहो’ है है जो अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के महत्त्व एवं तरीके पर विस्तृत जानकारी देता है।

चौथा इकाई ‘आस-पास है क्या-क्या?’ है। इस इकाई में अलग अलग प्रकार के पदार्थों/धातुओं जैसे लकड़ी, कांच, प्लास्टिक से निर्मित उन वस्तुओं को शामिल किया गया है जिन का उपयोग मनुष्य सुविधापूर्वक रहने के लिए करते हैं। साथ ही इस संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं कि अपने आस पास के परिवेश को स्वच्छ बनाए रखने के लिए उसका प्रबंधन कैसे किया जाना चाहिए। इस इकाई का पहला अध्याय ‘वस्तुओं की दुनिया’ है। यह अध्याय बच्चों को यह जानने में मदद करता है कि कौन कौन सी वस्तुएं प्रकृति निर्मित है और कौन-कौन मानव के द्वारा बनाई गई है। दूसरा अध्याय ‘कैसे बनी ये वस्तुएँ?’ है, इस अध्ययन में यह पता लगाने का प्रयास किया गया है कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके किस प्रकार घरों का निर्माण किया जाता है? तीसरा अध्याय ‘क्या और कैसे करें इसका?’ है। इस अध्याय में हमें अपने घरों और आसपास स्वच्छता बनाए रखने के तरीकों से परिचित कराया गया है।

एससीईआरटी, रायपुर के द्वारा प्रकाशित 162 पृष्ठों वाले हमारे आस पास के जीवन से संबंधित जानकारियों से सुसज्जित इस पाठ्यपुस्तक के अध्ययन से प्राप्त अंतर्दृष्टि को निम्न बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है -  

·       पाठ्यपुस्तक बहुत ही सरल तरीके से सरल शब्दों में बच्चों के आसपास की दुनिया जैसे – मिट्टी, नदी, पहाड़, उनपर आश्रित रहने वाले अलग-अलग आकार-आकृतियों के पेड़-पौधे (शाक, घास, लताऐं, बेल) उसके भाग (जड़, तना, पत्ती, फूल, फल, बीज) उनकी विशेषताएं, महत्ता/उपयोगिता, इन पेड़-पौधों पर आश्रित रहने वाले पशु-पक्षी, जीव-जन्तु (उनकी बोली, परिवार-रिश्ते जैसे विभिन्न सामाजिक अवधारणाओं, सांस्कृतिक जीवन (खानपान, कपड़े, त्योहार) आदि से परिचित कराता है। इनके संरक्षण की आवश्यकता, तरीके पर समझ विकसित करता है।

·       इस पाठ्यपुस्तक में एक अच्छी बात यह लगी कि प्रत्येक इकाई से संबंधित अध्यायों के संबंध में शिक्षकों को संक्षेप में परिचित कराया गया कि इस इकाई के अंतर्गत कितने अध्याय हैं? किस अध्याय में किसके संबंध में चर्चा की गई है? उस अध्याय पर कार्य करने के दौरान किन किन शिक्षण सहायक सामग्रियों की आवश्यकता होगी? को भी संक्षेप में बेहतर तरीके से बताया गया है ताकि पाठ को समझने में शिक्षक के साथ-साथ बच्चों को भी कोई असुविधा न हो। विशेष रूप से शून्य लागत वाले शिक्षण सहायक सामग्री।   

·       समूह कार्य, यह जोड़ी में रहकर स्वयं से कार्य कर सीखने को बढ़ावा दिया गया है।

·       प्रत्येक पृष्ठ में पाठ से संबंधित चित्रों को काफी बेहतर प्रिन्ट के साथ लगाया गया है।

·       प्रत्येक पाठ में मानवीय मूल्यों को विकसित करने वाले सवालों को भी शामिल किया गया है। जैसे पहले अध्याय का एक सवाल देख सकते हैं – क्या आपको लगता है कि हमें जानवरों को तंग क्यों नहीं करना चाहिए या चोट क्यों नहीं पहुंचाना चाहिए? जानवरों के व्यवहार से भी परिचित कराते हुए ये बताया गया है कि जानवरों से डर लगने या उन्हें पसंद न करने पर भी मारना नहीं चाहिए। क्योंकि आम तौर पर जानवर हमें तब तक नुकसान नहीं पहुंचाते हैं, जब तक कि वे हमसे खतरा महसूस नहीं करते। गर्मी के महीने में पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करने हेतु बर्डबाथ बनवाना।

·       पीका-बू (छुपम-छुपाई), अंताक्षरी, सांप-सीढ़ी, पिट्टुल जैसे स्थानीय, पारंपरिक खेल जिससे लगभग सभी बच्चे परिचित होते हैं, को शामिल किया गया है, ताकि बच्चे स्वयं को उससे जोड़ कर कही जा रही बातों को समझ सकें।

·       किसी अवधारणा पर कार्य करने के बाद दिया गया अभ्यास कार्य समझ व स्मरण आधारित होने के साथ-साथ स्वतंत्र चिंतन या व्यक्तिगत अनुभव व्यक्त करने से संबंधित है।

·       पाठ्यपुस्तक को इतनी बेहतरीन तरीके से बनाया गया है कि संबंधित अवधारणा पर समझ बनाने में अलग से कार्यपत्रक के उपयोग की आवश्यकता महसूस नहीं होती है।

·       एक अवधारणा पर समझ बनाने के बाद उनसे संबंधित कुछ स्वतंत्र चिंतन करने वाले कुछ सवाल दिए गए हैं, उसपर कार्य कर समझ बनाने के बाद आगे की अवधारणा से परिचित कराया गया है। 

·       ऐसे वाक्य प्रयुक्त किए गए हैं जो लैंगिक विषमता को पाटने का कार्य करता है जैसे – मेरे माता पिता घर की सफाई और खाना पकाने से लेकर बाजार के सभी कामों में एक दूसरे की सहायता करते हैं। रवि भैया सब्जियों को साफ करके काटने में सहायता करते हैं। (अध्याय 1, पृष्ठ 10)

·       प्रत्येक अध्याय में गणितीय दक्षता से संबंधित प्रश्न भी शामिल किए गए हैं- जैसे – आपके परिवार में उम्र में सबसे बड़ा व्यक्ति कौन है? आपके परिवार में उम्र में सबसे छोटा व्यक्ति कौन है? आपके परिवार में सबसे लंबा व्यक्ति कौन है? (अध्याय 1, पृष्ठ 12)

·       चित्र पठन, समझ के साथ चिंतन करते हुए लेखन करने से संबंधित गतिविधियां प्रत्येक पाठ में देखने को मिलती है।

·       प्रत्येक अध्याय में आसान से लगने वाले चित्र बनाने की गतिविधियां इस ओर इशारा करती है कि बच्चों के रचनात्मक विकास पर भी गहराई से कार्य किया जा रहा है।

·       FLN स्तर के बच्चों को भी ध्यान में रखते हुए उनके लिए डिकोडिंग व बौद्धिक विकास से संबंधित सवाल (वर्ग पहेली) रखे गए हैं। 

·       संबंधित अवधारणाओं पर बेहतर समझ बनाने के लिए रोल प्ले (नाटकीय रूपांतरण) जैसे शिक्षण विधि को भी शामिल किया गया है। (अध्याय 2 पृष्ठ 32)

·       मौखिक भाषा विकास हेतु चर्चा किए जा रहे विषय से संबंधित बालगीत, कहानी को भी शामिल किया गया है। जैसे अध्याय 3 में शामिल किया गया बालगीत ‘वसंत ऋतु’। अध्ययन आठ में भोजन की महत्ता को दिखाने के लिए ‘शशि की कहानी – धावक’ नामक कहानी का उपयोग किया गया है।

·       आगे की कक्षा में मानचित्र के घटकों (दिशा, संकेत चिन्ह) की ओर ले जाने हेतु पृष्ठभूमि तैयार की गई है। (अध्याय 3 पृष्ठ 43)

पाठ्यपुस्तक के उपरोक्त विशेषताओं के अतिरिक्त कुछ ऐसे भी कमियाँ देखने को मिली जो ये यदि सम्मिलित होते तो पाठ्यपुस्तक की समृद्धि को बढ़ा रहे होते।

·       ‘त्योहार मनाएं एक साथ’ पाठ में भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में वसंत ऋतु से संबंधित त्योहार मनाए जाने की बात आई है, आकलन खंड में विभिन्न क्षेत्र व धर्मों से संबंधित त्योहारों या धार्मिक आयोजनों (जैसे क्रिसमस, ईद उल फ़ितर, छठ पूजा आदि) को शामिल किया गया है। इसी आधार पर इसके पूर्व के अध्याय में मेला का जिक्र करते हुए कुंभ को शामिल किया गया है। ईद के अवसर पर ईदगाह में लगने वाले मेले का भी यदि वहाँ उल्लेख किया जाता तो इस्लाम धर्म मानने वाले बच्चे भी मेले की अवधारणा से जुड़ पाते।

·       पूरे पाठ्यपुस्तक में एक ही धर्म केंद्रित पात्रों के नाम को शामिल किया गया है। पाठ्यपुस्तक को समावेशी बनाने के लिए अन्य धर्मों से संबंधित लोगों के नाम को शामिल किया जा सकता था। उदाहरण के लिए एक अध्याय में यदि बेला का नाम आ रहा है तो अगले अध्याय में शबाना, जॉन, अब्दुल जैसे नाम का भी जिक्र किया जा सकता था।

·       अध्याय 3 त्योहार मनाएं एक साथ में गतिविधि 1 को शामिल करने का लॉजिक समझ नहीं आया। (पेज 36) इस गतिविधि से संबंधित चर्चा इस अध्याय में नहीं की गई है।

·       तीसरे अध्याय में ऐसे ऐसे व्यंजनों का नाम (होलिगे, सद्दा) शामिल किया गया है जिसके बारे में बच्चों को बता पाने में बहुत ही मुश्किल होगी कि इसका संबंध किस त्योहार से है? 

नउम्मीद है कि नए कलेवर में लाया गया यह पाठ्यपुस्तक बच्चों में 21 वीं सदी के कौशल को विकसित करने में सहायक होगा। 



Saturday, 3 August 2024

BRC बेमेतरा में 5 दिवसीय अंगेजी प्रशिक्षण (कीप टॉकिंग) संपन्न

शासकीय प्राथमिक शालाओं के शिक्षक अंग्रेजी भाषा बोलने में दक्ष हों, ताकि बच्चों को इसका पर्याप्त लाभ मिल सके, इस बात को ध्यान में रखते हुए बेमेतरा विकासखंड के शिक्षकों के लिए डाइट बेमेतरा की ओर से दिनांक 29 जुलाई से 2 अगस्त के बीच 5 दिवसीय अंग्रेजी प्रशिक्षण (कीप टॉकिंग) आयोजित किया गया। विकासखंड के प्राथमिक शाला के शिक्षकों के लिए यह प्रशिक्षण दो केंद्र डाइट - बेमेतरा एवं बीआरसी - बेमेतरा पर आयोजित किया गया। बीआरसी बेमेतरा केंद्र पर आयोजित इस प्रशिक्षण में 56 शिक्षकों की सहभागिता रही।

अंग्रेजी भाषा में सामान्य बातचीत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से फाइंड योर ट्विन खेल, गेसिंग गेम, ब्लेंड क्रीचर, पिक एंड स्पीक, जाऊ ऑफ़ डेथ आदि गतिविधि, बेहिचक अंग्रेजी बोलने के लिए व्हाटइवर स्पीक नॉन-स्टॉप, अंग्रेजी भाषा में सांस्कृतिक गतिविधि जैसे दर्जनों रोचक गतिविधियों के माध्यम से 5 दिनों तक शिक्षकों को लगातार अंग्रेजी बोलने का माहौल दिया गया।

प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि बच्चों को अंग्रेजी भाषा को समझ के साथ सुनने और अपने विचार को अंग्रेजी भाषा में ही सोचकर बोलने में दक्ष करने के लिए अंग्रेजी भाषा शिक्षण के दौरान उनके साथ अंग्रेजी भाषा में ही लगातार बातचीत अपेक्षित है। किसी प्रसंग का हिंदी अनुवाद कर बताने को न्यूनतम स्थान दिया जाना चाहिए. कोड मिक्सिंग (किसी भाषा में हो रही बातचीत में कुछ अंग्रेज़ी के शब्द शामिल करना) से कोड स्विचिंग (बातचीत में पूर्णतः अंग्रेजी शब्द शामिल करना) की ओर बढ़ने की बात की गई. मास्टर ट्रेनर के रूप में उपस्थित शासकीय प्राथमिक शाला, मांझीडेरा (बेरला विकासखंड) के शिक्षक दुर्गाशंकर पटेल एवं अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन बेमेतरा के साकेत बिहारी ने प्रशिक्षण के व्यवस्थित संचालन में योगदान दिया. शासकीय प्राथमिक शाला भनसुली के प्रधान पाठक राम सोहागी सिन्हा ने भी प्रशिक्षणार्थियों को विभिन्न प्रकार के अंग्रेजी शब्दों के उच्चारण करने के नियमों पर विस्तृत चर्चा कर यह समझ बनाया कि सी का उच्चारण कब ‘स’ और कब ‘क’ होगा. वर्ष 2016-17 के दौरान उन्होंने अंग्रेजी शब्दों के उच्चारण को लेकर किए गए क्रियात्मक अनुसंधान को भी प्रस्तुत किया.

कार्यशाला के पांचवें दिन जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, बेमेतरा के व्याख्याता श्रद्धा तिवारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, बेमेतरा अरुण कुमार खरे, विकासखंड स्त्रोत समन्वयक, बेमेतरा राजेंद्र कुमार साहू ने भी शिक्षकों का उत्साहवर्द्धन किया। विकासखंड शिक्षा अधिकारी, बेमेतरा अरुण कुमार खरे और विकासखंड स्त्रोत समन्वयक, बेमेतरा राजेंद्र कुमार साहू द्वारा सभी प्रशिक्षणार्थी शिक्षकों को सहभागिता प्रमाण-पत्र भी दिया गया.  



प्रतिभागी शिक्षकों को सहभागिता प्रमाणपत्र देते BEO & BRC बेमेतरा 




Saturday, 8 July 2023

साजा में तीन दिवसीय सामाजिक विज्ञान कार्यशाला संपन्न।

साजा विकासखंड के उच्च प्राथमिक शालाओं में सामाजिक अध्ययन विषय का अध्यापन कराने वाले शिक्षकों का 3 दिवसीय कार्यशाला दिनांक 5, 6 एवं 8 जुलाई 2023 को दो बैच में संपन्न हुआ। इस कार्यशाला में उन्हें सामाजिक अध्ययन विषय अंतर्गत ग्राम पंचायत, जीवन में आए बदलाव, संसाधन आदि अध्याय संबंधी अवधारणाओं के शिक्षण का उदाहरण लेते हुए बच्चों में भाषाई एवं गणितीय दक्षता सुनिश्चित कराने वाले गतिविधियों को समाहित करते हुए पाठ योजना निर्माण एवं क्रियान्वयन संबंधी चर्चा की गई। साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सभी शालाओं को आवंटित संभावना एवं नवा-अंजोर कार्यपत्रक के प्रयोग, बाल शोध मेला जैसे रोचक शिक्षण विधियों के माध्यम से बच्चों में सामाजिक अध्ययन विषय के प्रति रुचि जगाने संबंधी विस्तृत चर्चा की गई। कार्यशाला में उपस्थित शिक्षकों ने फीडबैक सत्र के दौरान अपने विचार साझा करते हुए बताया कि तर्क करने, तुलना करने, विश्लेषण करने, समझ के साथ पठन, मौखिक एवं लिखित अभिव्यक्ति कौशल आदि के अभाव में बच्चे सही तरीके से सामाजिक विज्ञान संबंधी अवधारणाओं को समझ नहीं पाते, इसके लिए उन्हें भाषाई एवं गणितीय कौशलों में दक्ष करना आवश्यक है। साथ ही शिक्षकों एवं बच्चों की इस विषय में रुचि भी एक प्रमुख चुनौती है, ऐसे में इस कार्यशाला के माध्यम से उन्हें सामाजिक अध्ययन की अवधारणाओं के साथ-साथ भाषाई एवं गणितीय दक्षता पर समुचित रूप से कार्य करने की अंतर्दृष्टि मिली।

            इस कार्यशाला में साजा विकासखंड के उच्च प्राथमिक शालाओं में सामाजिक अध्ययन विषय का शिक्षण कराने वाले कुल 75 शिक्षक शामिल हुए। प्रतिभागियों की संख्या को देखते हुए कार्यशाला को 2 बैच में विभाजित करते हुए संपन्न कराया गया। एक बैच माध्यमिक शाला परसबोड़ एवं दूसरा बैच साजा स्थित अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के शिक्षक अधिगम केंद्र में आयोजित की गई। इस दौरान मास्टर ट्रेनर के रूप में राजेंद्र रात्रे, विजय बहादुर सिंह राजपूत, शंकर राम साहू, राजाराम साहू, संतोष सिंह राजपूत, केदारनाथ साहू तीनों दिन शिक्षकों को प्रशिक्षित किया।

            अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, बेमेतरा से श्रेष्ठा मिश्रा एवं साकेत बिहारी सत्र संचालक एवं सूत्रधार की भूमिका में उपस्थित रहे। एपीसी बेमेतरा श्री कमल नारायण शर्मा एवं बीआरसी साजा श्री बी. डी. बघेल ने भी अलग-अलग दिन उपस्थित होकर प्रतिभागी शिक्षकों से भाषाई एवं गणिती दक्षता में पिछड़ रहे बच्चों के क्षमता वर्धन हेतु पूरी तन्मयता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

बैच 1 



बैच 2 

Friday, 5 May 2023

जिला शिक्षा अधिकारी की अपील पर शिक्षक आयोजित कर रहे हैं बच्चों के लिए ‘समर कैंप’

 जिला शिक्षा अधिकारी श्री अरविंद मिश्रा जी की जिले के शिक्षकों से स्वेच्छिक रूप से बच्चों के लिए समर कैंप आयोजित करने की अपील रंग ला रही है। वार्षिक परीक्षा खत्म होने के साथ ही जिले के शिक्षक अपने-अपने शालाओं में बच्चों के लिए 5 से 10 दिन की योजना बनाकर स्वेच्छिक रूप से सुबह 08: 00 से 10: 30 बजे तक समर कैंप का आयोजन कर रहे हैं। जिले में कुछ स्कूल इसे पूर्ण कर चुके हैं तो बहुत से स्कूल इसे अभी संचालित कर रहे हैं या संचालित करने हेतु योजना निर्माण पर कार्य कर रहे हैं। इस समर कैंप के माध्यम से शिक्षक बच्चों में कल्पनाशीलता, आत्मविश्वास, तार्किक सोच, सृजनशीलता, अभिव्यक्ति जैसे कौशल बालगीत, मौखिक भाषा विकास व एकाग्रता विकसित करने वाले खेल, चित्रकारी, कागज व मिट्टी के खिलौने निर्माण, कहानी निर्माण, रचनात्मक लेखन, जैसे रोचक गतिविधियों के माध्यम से समृद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं। बच्चे भी पूरे उमंग व उत्साह के साथ इसे आनंद उत्सव के रूप में मनाते हुए अपने भाषाई, गणितीय व अन्य कौशल को समृद्ध कर रहे हैं। इन-इन गतिविधियों में बच्चे ले रहे रुचि –

·    दर्जनों बालगीत (हिंदी एवं अंग्रेजी भाषी) को हाव-भाव के साथ गाना (एक बुढ़िया ने बोया दाना, पहाड़ी पर पेड़ था, चूहों ! म्याऊँ सो रही है, हमने तीन चीजें देखी, श्यामा की गुड़िया के हाथ नहीं, आहा टमाटर बड़े मजेदार,  मम्मी ओपेन द डोर, फाइव लिटिल मंकी... मेरे नौ बतख थे, पानी में तैर रहे थे आदि)  

·       ओरिगेमि पेपर से तितली बनाना। 

·       न्यूज़ पेपर से टोपी बनाना।

·       स्वेच्छा से ड्रौइंग-पेंटिंग बनाना एवं उसके संदर्भ में अपने अनुभव 5 से 10 वाक्य में लिखना

·        कहानी बनाना सिखाना एवं इसकी निरंतरता में बच्चों से एक अलग कहानी बनाना।

·       भाषा एवं गणित के रोचक खेल जैसे - नंबर गेम, नंबर जंप, आलू खाओ पंखा खाओ, शब्द जाल

·       मिट्टी के खिलौने बनाना, उसे रंगना एवं उसकी लेबलिंग करना।  

बेमेतरा विकासखंड अंतर्गत शा. प्रा. शाला बसनी (7 दिवसीय), शा. प्रा. शाला निनवा (10 दिवसीय), शा. प्रा. एवं उच्च प्रा. शाला कठौतिया (5 दिवसीय) के शिक्षक समर कैंपआयोजन को पूर्ण कर चुके हैं। जबकि शा. प्रा. शाला गुनरबोड़, शा. प्रा. शाला मटका, शा. प्रा. शाला हथमुड़ी, शा. प्रा. शाला नरी (सभी बेमेतरा विकासखंड) शा. प्रा. शाला तेंदुभाठा, शा. प्रा. शाला अतरझोला, शा. प्रा. शाला बीजागोंड (सभी साजा विकासखंड) शा. प्रा. शाला जामगाँव, शा. प्रा. शाला तबलघोर, शा. प्रा. शाला तिवरईया (सभी बेरला विकासखंड) शा. प्रा. शाला तिलकापारा (नवागढ़ विकासखंड) के शिक्षक स्वेच्छिक रूप से चारों विकासखंड में मौजूद अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन के सदस्यों के सहयोग से आयोजित कर रहे हैं।

          संकुल समन्वयक सहित जिला/विकासखंड स्तर के शिक्षा विभाग के अधिकारी, डाइट व्याख्याता आदि आयोजित हो रहे इन समर कैंप में भी सहभागिता कर शिक्षक व बच्चों के कार्यों की सराहना कर रहे हैं। उन्हें उत्साहित करने के साथ-साथ इस आयोजन में अधिक-से-अधिक संख्या में स्वेच्छिक रूप से शामिल होने की शिक्षकों से अपील कर रहे हैं।   



Friday, 24 March 2023

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन, बेमेतरा द्वारा कार्यक्रम का आयोजन।

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, जिला शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला पुलिस विभाग, विधिक सेवा विभाग, एवं अजीम प्रेमजी फाउंडेशन बेमेतरा के संयुक्त तत्वावधान में आज दिनांक 24 मार्च 2023 को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, बेमेतरा के सभागार में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर संगोष्ठी एवं पुस्तक प्रदर्शनी आयोजित किया गया। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, बेमेतरा के छात्र-छात्राध्यापक, विकासखंड के शासकीय शालाओं के शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राएं सहित 130 लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए। इन सभी के क्षमतावर्द्धन के लिए अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन, बेमेतरा के सदस्यों की ओर से सभागार में ही भाषा, गणित, ईसीई कॉर्नर के साथ-साथ पढ़ने लिखने की संस्कृति विकसित करने के लिए पुस्तक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत में सभी दर्शकों ने इन कॉर्नर की गतिविधियों का अवलोकन किया, भाषा व गणित कॉर्नर में प्रदर्शित पहेलियों को सुलझाने का सफल प्रयास किया। असफल होने के दुख का भी खुशी पूर्वक आनंद लिया।

          तत्पश्चात आमंत्रित वक्ताओं ने अपने वक्तव्य रखा। अधिवक्ता सुश्री रजनी पांडे ने स्त्रियों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार, हिंसा आदि की रोकथाम के लिए भारतीय दंड संहिता में उल्लेखित कानूनी प्रावधान के साथ-साथ पोक्सो एक्ट पर संक्षेप में चर्चा की। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के व्याख्याता श्री हेमंत कुमार भुवाल ने कुछ संस्कृत श्लोक आदि के माध्यम से हमारे समाज में स्त्रियों को दिए गए दर्जे के विपरीत उनकी वास्तविक स्थिति को समझाने का प्रयास किया। प्रधान महिला आरक्षक, बेमेतरा पुलिस श्रीमती वर्षा चौबे ने एक महिला आरक्षक के रूप में अपने जीवन संघर्ष के साथ-साथ दिन प्रतिदिन के चुनौतियों से श्रोताओं को रूबरू करवाया। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, बेमेतरा की प्रधान पाठक श्रीमती सुषमा शुक्ला शर्मा ने अफगानिस्तान, ईरान आदि कई देशों में स्त्रियों की पराधीनता के उदाहरण देते हुए, उनकी स्थिति से रूबरू कराते हुए सभागार में उपस्थित समस्त महिलाओं को सशक्त बनने के लिए प्रेरित किया। साथ ही कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय बेमेतरा में कार्यरत रहते हुए अपने कार्य अनुभव को साझा किया। विद्यालय में पढ़ने वाले कई बच्चों की माताओं, बेमेतरा में ऑटो चलाने वाली महिलाओं का उदाहरण देते हुए उपस्थित दर्शकों को सशक्त होने का संदेश दिया।

          अतिथि के रूप में आमंत्रित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान बेमेतरा के प्राचार्य, श्री जे. के.  घृतलहरे, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, बेमेतरा श्री अरुण कुमार खरे आदि ने भी अपने वक्तव्य रखे। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन बेमेतरा की ओर से डॉ. प्रीतिमाला सिंह ने कुछ लघु वीडियो क्लिप को दिखाते हुए हमारे समाज में स्त्रियों की स्थिति, समाज द्वारा उनके साथ होने वाले व्यवहार, आदि पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम का संचालन अजीम प्रेमजी फाउंडेशन बेमेतरा के जयप्रकाश धन्यवाद ज्ञापन जौबन भोई ने किया।