बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर सोसल मीडिया पर
“बुद्धम शरणम गच्छामि” सहित काफी शुभकामना संदेश post/share किये जा रहे हैं । इसके साथ-साथ खुद को उनके
अनुयाइयों कहलानेवाले श्रद्धालुओं द्वारा वही आडंबर,
कर्मकांड किए जा रहे हैं । “बुद्धम शरणम गच्छामि” का अर्थ होना चाहिए हम बुद्ध के
विचारों को सर्वप्रथम जानें । तत्पश्चात वर्तमान में उनके जो विचार प्रासंगिक हैं
उसे ग्रहण कर उस अनुसार हम आचरण करें । यह नहीं कि ढेर सारी अनगिनत मूर्तियाँ
चौक-चौराहों, मठों-मंदिरों, पार्कों
में स्थापित कर फूल, चन्दन, धूप, अगरबत्ती, माला चढ़ाकर उन्हीं कर्मकांडों के गुलाम
हो जाएँ जिसका उन्होनें एक समय विरोध किया था । उन्हें एक समाज-सुधारक ही रहने दें
। false भगवान न बनाएँ ।