आंगनबाड़ी
से लेकर 10वीं बोर्ड परीक्षा तक के सफ़र में हम कई भाषाएं सीखते हैं. जैसे – हिंदी,
अंग्रेजी, संस्कृत आदि. शालाओं में भाषा शिक्षक द्वारा साहित्य के कई विधाओं जैसे
कहानी, कविता, निबंध, जीवनी, नाटक, यात्रावृत्तांत, व्यंग्य आदि के माध्यम से
लक्षित भाषा में सुनने, बोलने, पढ़ने, लिखने के साथ-साथ उस भाषा में कल्पना कर
विचार अभिव्यक्त करने का कौशल सिखाया जाता है. इस प्रक्रिया में कहानी के बाद बच्चों
के बीच यदि कोई अन्य लोकप्रिय विधा है, तो वह है कविता. आंगनबाड़ी से कविता को हाव-भाव
के साथ गाने का जो अनुभव बच्चों को मिलता है उसका सकरात्मक प्रभाव कक्षा 1 में सामान्यतः
देखने को मिलता है. लेकिन यह बहुत दिनों तक रह नहीं पाता है. कुछ गिनती के
शिक्षकों को छोड़ दें तो अधिकाँश भाषा शिक्षक ऐसे देखने को मिलते हैं जो पाठ्यपुस्तक
में दी गई कविता को भी लयबद्ध, हाव-भाव व आवाज़ के उतार चढ़ाव के साथ गाने में झिझक
महसूस करते हैं.
शुरुआती कक्षा की कविताओं का यदि हम अवलोकन करें तो बच्चों
को आनंद के साथ भाषाई कौशल विकसित करने के बहुत से तत्व मौजूद मिलेंगे जैसे - कविताएं
तुकबंदी युक्त मिलेंगे, जिन्हें लयबद्ध गाने में बच्चों को आनंद आता है. यहाँ तुकबंदी से
तात्पर्य है किसी कविता की दो क्रमबद्ध पंक्तियों के अंत में ऐसे शब्दों का प्रयोग
जिनका अंतिम शब्द समान ध्वनि वाले हों. उदाहरण के लिए कक्षा 1 की एक कविता को देख
सकते हैं -
छह साल की छोकरी,
भरकर लाई टोकरी.
टोकरी में आम है,
नहीं बताती दाम है.
उपरोक्त
कविता को यदि हम देखें तो इसकी वाक्य संरचना लेखक द्वारा इस प्रकार बनाया गया है
कि पंक्तियों के अंत में ‘छोकरी, टोकरी’
एवं ‘आम है, दाम है’ जैसे
समान तुकबंदी वाले शब्द आ रहे हैं. इन दोनों वाक्यों की अंतिम ध्वनि मिलती जुलती
है. बच्चों को इन्हें गाने में बहुत आनंद आता है.
क्यों जरूरी है
लयबद्ध होकर गाना?
किसी कविता पर काम कर रहे शिक्षक से यह अपेक्षा होती है कि बच्चों को यह मॉडलिंग कर बताएं कि किसी कविता को गाते कैसे हैं? अर्थात किसी कविता को केवल जैसे तैसे पढ़कर वह पाठ पूरा करने की जगह उस कविता को पहले खुद बेहतर तरीके से समझते हुए उसे बच्चों के साथ, पूरी रूचि के साथ, हाव – भाव, आवाज़ के उतार-चढ़ाव के साथ गाएं. प्रत्येक बच्चे को इस प्रक्रिया में शामिल करें. हाव-भाव और आवाज़ के उतार चढ़ाव के साथ गाने का यह लाभ है कि बच्चे प्रत्येक पंक्तियों से निकलने वाले अर्थ तक आसानी से पहुँच पाते हैं. छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रकाशित पाठ्यपुस्तकों में ‘शिक्षकों से कुछ बातें’ खंड में इस बिंदु पर जोर देते हुए अपेक्षा की गई है कि शिक्षक कविता व कहानी को हाव-भाव अथवा उतार-चढ़ाव के साथ सुनाने का अभ्यास करें.
इसके साथ ही कविता में प्रयुक्त सामान तुक वाले शब्दों की
ओर अवश्य ही ध्यान दिलाया जाना चाहिए क्योंकि एक तो समान तुक वाले शब्दों को बोलने
व गाने में बच्चों को आनंद आता है,
जिसके फलस्वरूप बोल रहे
शब्दों को, दैनिक दीवान में उनकी उपयोगिता को आत्मसात कर रहे होते हैं, उन
शब्दों के उच्चारण को भी बेहतर तरीके से समझ रहे होते हैं.