NIPUN (National
Initiative for Proficiency in Reading with Understanding and Numeracy) Bharat Mission भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण
शिक्षा पहल है, जिसकी शुरुआत, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार
द्वारा जुलाई 2021
में हुई. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के
प्रावधानों को क्रियान्वित करने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम की शुरुआत की गई जिसका
मुख्य उद्देश्य है कक्षा 3 तक प्रत्येक बच्चों में Foundational
Literacy and Numeracy (FLN) अर्थात बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान सुनिश्चित
करना। वर्ष 2026-27 तक इस लक्ष्य प्राप्ति का समय निर्धारित किया गया है. यह कक्षा
3 तक प्रत्येक बच्चे (सरकारी या निजी स्कूल का) में दो प्रकार की दक्षताएं
सुनिश्चित करने की बात करता है –
(1) FL
(Foundational
Literacy) अर्थात बुनियादी साक्षरता –
प्रत्येक बच्चे में बुनियादी
साक्षरता की दक्षता भाषा (हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, या अन्य स्थानीय भाषा) विषय
के प्रभावी अध्ययन से ही सुनिश्चित किया जा सकता है. इसके अंतर्गत कक्षा 3 तक प्रत्येक
बच्चे से अपेक्षित है कि वह किसी चित्र को देखकर, उसका अवलोकन कर मौखिक एवं लिखित
रूप से वह बता पाए कि चित्र में क्या-क्या (वस्तुओं के नाम) है? चित्र में छिपे
संदेश को मौखिक या लिखित रूप से बता पाए. किसी पाठ/कविता/कहानी या छोटे प्रसंग को
पढ़ने के बाद वह बता पाए कि यह कविता/कहानी/प्रसंग किससे संबंधित है, इसमें कौन-कौन
से पात्र हैं? उनके बीच क्या संवाद हो रहा है? कविता/कहानी/प्रसंग में प्रयुक्त
वाक्यों की क्रमबद्धता बता पाए. कविता/कहानी/प्रसंग में प्रयुक्त परिचित शब्दों का
अपने संदर्भ (दैनिक जीवन) में उपयोग कर पाए, अपरिचित शब्दों के अर्थ बता पाए. उस
कविता/कहानी/प्रसंग को अपनी कल्पना से आगे बढ़ा पाए, उसके अंत को एक अलग मोड़ दे
पाए. अपने दिमाग में चल रही बातों (विचारों) को लेखबद्ध कर पाए. सोचकर लिख पाने के
कौशल का उपयोग करते हुए कुछ नए कविता-कहानी का सृजन कर पाए.
(2) FN
(Foundational Numeracy) अर्थात बुनियादी संख्याज्ञान –
प्रत्येक बच्चे में बुनियादी
संख्याज्ञान की दक्षता गणित विषय के प्रभावी अध्ययन से ही सुनिश्चित किया जा सकता
है. इसके अंतर्गत तीसरी कक्षा के बच्चों से अपेक्षित है कि कक्षा के अंत तक बुनियादी
गणित के कौशल से युक्त हों. अर्थात गणितीय अवधारणाओं जैसे संख्या पूर्व अवधारणा
(रंग, आकार, माप, स्थिति, वर्गीकरण, एक-एक की संगति, तुलना करना आदि), संख्या समझ
(संख्या नाम एवं उसके लिए निर्धारित संकेत, गिनती) संक्रिया (जोड़ना, घटाना, गुणा,
भाग) आकृति एवं स्थानिक समझ, मापन (लम्बाई, मानक व अमानक इकाइयों की समझ), पैटर्न,
डाटा प्रबंधन, गणितीय सोच का मौखिक या लिखित प्रस्तुतीकरण, गणित का दैनिक जीवन में
उपयोग. इसे एक उदाहरण से हम बेहतर तरीके से समझ सकते हैं. किसी पहली कक्षा के बच्चे
को हमने 10 आम दिए और उनसे हम निम्न सवाल पूछे –
·
आम का आकार कैसा है? गोल है,
त्रिकोण है या चौकोर?
·
आम को गिन कर और लिखकर बताओ
कि आपके पास कितने आम हैं?
·
आपके पास 10 आम हैं 2 और आम
मैंने आपको दे दिए अब आपके पास कितने आम हैं?
·
10 आम में से 5 आम अपने
दोस्त को दे दो. अब कितने आम आपके पास बचे?
·
10 आम को अपने 1 दोस्त से
बांटो. दोनों को कितने-कितने आम मिलेंगे?
·
एक हाथ में 2 आम दुसरे हाथ
में 3 आम रखो अब तुलना कर बताओ कौन हल्का है कौन भारी?
दूसरी व तीसरी कक्षा
के बच्चों से उनके कक्षा अनुरूप निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप सवाल को modify कर पूछ
सकते हैं – जैसे – कक्षा 3 के बच्चों से अपेक्षा है कि 1 से 9999 तक की संख्या से
संबंधित संक्रिया हल करना). इस तरह तीसरी कक्षा का कोई बच्चा यदि 1 से 4 अंकों से
संबंधित सवालों के सही जवाब दे देते हैं तो हम कह पाएँगे कि उस बच्चे ने FN (Foundational
Numeracy) skill हासिल कर लिया है.
NIPUN
Bharat Mission के अंतर्गत उपरोक्त दोनों विषयों से संबंधित दक्षताओं
की प्राप्ति पर इसलिए भी जोर दिया गया कि ये दक्षताएं ही आगे की कक्षा के अलग-अलग
अवधारणाओं पर समुचित समझ बनाने का काम करते हैं. बिना इसके पर्यावरण अध्ययन,
विज्ञान, सामाजिक विज्ञान की अवधारणाओं को समझ पाना बच्चों के लिए चुनौतीपूर्ण हो
जाता है.
बच्चों
के साथ-साथ शिक्षकों का क्षमतावर्द्धन भी इसका एक प्रमुख उद्देश्य है. शिक्षकों से
अपेक्षा है कि बच्चों में उपरोक्त दोनों विषयों से संबंधित दक्षता सुनिश्चित करने के
लिए ऐसे शैक्षिक विधियों (pedagogy), प्रक्रियाओं का
इस्तेमाल करें जिससे बच्चे खेल-खेल में भरपूर आनंद लेते हुए सीख पाएं. जैसे – खेल
आधारित शिक्षण, गतिविधि आधारित शिक्षण, कहानी एवं कविता के माध्यम से शिक्षण,
अनुभवात्मक शिक्षण, बाल केंद्रित शिक्षण, TLM का प्रयोग आदि.
एक उदाहरण के माध्यम
से इसे बेहतर तरीके से समझा जा सकता है - भाषाई दक्षता लाने के लिए कविता/कहानी को
रुचिपूर्ण तरीके से हाव-भाव, आवाज के उतार-चढ़ाव, के साथ सुनाएं (खेल एवं गतिविधि
आधारित शिक्षण), कविता/कहानी के पात्रों, प्रमुख घटनाओं पर बच्चों को अपने विचार
अभिव्यक्त करने के अवसर दें (बाल केंद्रित शिक्षण). उस कविता/कहानी को Stick
Puppet या Hand Puppet के माध्यम से सुनाएं (TLM का प्रयोग). बच्चों से उस कविता/कहानी
का नाट्य रूपांतरण करवाएं ((खेल एवं गतिविधि आधारित शिक्षण).
इसी
तरह गणितीय दक्षता विकसित करने के लिए किसी भी अवधारणा पर काम करने से पूर्व उससे
संबंधित कोई कविता कहानी सुनाएं, या बातचीत करें (कहानी
एवं कविता के माध्यम से शिक्षण), बातचीत करते हुए बच्चों को
ठोस वस्तुओं की सहायता से उसे अवधारणा तक ले जाएं उदाहरण के लिए अलग-अलग आकर से
संबंधित ठोस वस्तु जैसे गोला, बेलन, घन,
घनाभ आदि मॉडल पर टॉर्च जलाकर उसकी परछाई का अवलोकन करवाना (TLM का
प्रयोग, अनुभवात्मक शिक्षण). धारिता पर काम करते हुए पहले अमानत इकाइयों से पानी
को मापना, फिर मानक इकाई से पानी को मापते हुए दोनों के बीच
के अंतर समझते हुए धारिता से संबंधित मानक इकाइयों की आवश्यकता को समझना (TLM का
प्रयोग, अनुभवात्मक शिक्षण).
उपरोक्त
बातों से यह स्पष्ट है कि NIPUN Bharat Mission भाषाई एवं
गणितीय अवधारणाओं को rote learning की जगह समझ के साथ सीखने पर बल देता है. इस
तकनीक से यदि बच्चों के साथ काम किया जाए तो वे भाषा शिक्षण के उद्देश्यों को समझ
पाएँगे, भाषा एवं गणित विषय के अमूर्त अवधारणाओं को मूर्त वस्तुओं के माध्यम से
समझ पाएँगे, किसी भी घटना के पीछे निहित कार्य-कारण संबंध को जान पाएँगे जिससे वे
logical thinking की ओर अग्रसर हो रहे होंगे, गणित के सवालों को हल करते हुए मानक
कलन विधि (standard algorithm) के पीछे निहित तर्क को समझ सकेंगे, अपनी बातों के समर्थन
में तर्क देना सीख पाएंगे. इस तरह यह बच्चों में उन भाषाई एवं गणितीय कौशल विकसित
करने की बात करता है, जो हमारे बच्चों को 21वीं सदी के नागरिक के रूप में विकसित
करने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.