स्वतंत्रता प्राप्ति
के पश्चात नवनिर्मित भारतीय संविधान द्वारा 14 वर्ष के बच्चों
के लिए अनिवार्य व निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने का दायित्व राज्यों को सौंपा गया
था. लेकिन संविधान लागू होने के 3 दसक बीत जाने तक भी देशभर
के राज्य सरकार इस व्यवस्था को अपनाने में असमर्थ रहा. हालाँकि इन तीन दसकों के
दौरान हमारे देश में प्राथमिक शिक्षा का प्रसार काफी योजनाबद्ध तरीके से हुआ.
फलस्वरुप बड़ी संख्या में प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना हुई. विद्यालयों की
स्थापना के दौरान वहां आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया.
विद्यालयों की संख्या में इस वृद्धि का शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव
पड़ा. कहीं विद्यालयों के अपने भवन नहीं थे, तो कहीं
विद्यालयों में श्यामपट्ट नहीं थे, कहीं पुस्तकालय की सुविधा
नहीं थी तो कहीं खेल के मैदान नहीं थे. पेय जल, शौचालय मात्र
11 % विद्यालयों में ही उपलब्ध थी. भारत सरकार द्वारा 1985
में जारी दस्तावेज 'शिक्षा की चुनौती : नीति संबंधी परिप्रेक्ष्य'
में प्राथमिक शिक्षा की इन कमियों को चिन्हित करते हुए इसमें सुधार
करने की आवश्यकता पर बल दिया गया.
यही
कारण है कि वर्ष 1986 ईस्वी में राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के
कार्यकाल में जब दूसरी शिक्षा नीति (राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986) आई, तो इस
दस्तावेज में सभी वर्गों के लिए शिक्षा के साथ-साथ प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता पर
विशेष जोर दिया गया. इस दस्तावेज में प्रत्येक स्कूल में आवश्यक सुविधाएं व शिक्षण
संसाधन उपलब्ध कराने की बात थी. शिक्षा नीति की बातों (प्राथमिक विद्यालयों में
न्यूनतम आवश्यक सुविधा की व्यवस्था) को ध्यान में रखते हुए 1987 ई. में Operation
Blackboard कार्यक्रम की शुरुआत की गई. स्कूल में सीखने
का उचित वातावरण मिले इसके लिए प्रत्येक स्कूल में निम्न सुविधाएं उपलब्ध कराने का
प्रयास किया गया -
·
प्रत्येक स्कूल में कम-से-कम
दो उपयोगी कक्षाएं या कमरे.
·
कम से कम दो शिक्षक, ताकि विद्यालय केवल एक शिक्षक पर निर्भर ना रहे.
·
आवश्यक शिक्षण सामग्री (TLMs)
·
बच्चों के सीखने के लिए
शैक्षिक उपकरण और सामग्री.
राष्ट्रीय शिक्षा
नीति 1986 में वर्ष 1992 में किए गए संशोधन में ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड के क्षेत्र को
उच्च प्राथमिक शालाओं तक विस्तृत कर दिया गया.
अध्ययन हेतु प्रयुक्त पुस्तक/सामग्री
· गुप्ता,
डॉ. अलका, एस पी, ‘आधुनिक भारतीय शिक्षा की समस्याएं’ शारदा पुस्तक भवन, इलाहाबाद,
2016