Friday, 5 April 2019

हमारा सौर मण्डल



मंदाकिनी/आकाशगंगा
·      हमारी पृथ्वी जिस आकाशगंगा का अंग है इसमें लगभग 150 अरब तारे हैं। सूर्य भी इनमें से एक तारा है। खगोलशास्त्रियों के अनुसार ऐसे आकाशगंगाएँ करोड़ों की संख्या में हैं।
·      सूर्य तथा पृथ्वी के बीच की दूरी 15 करोड़ किलोमीटर है। प्रकाश की किरण 1 सेकंड में 300000 किलोमीटर की दूरी तय करती है। इस आधार पर कहां जा सकता है कि सूर्य के प्रकाश को सूर्य से पृथ्वी तक की दूरी तय करने में 8 सेकंड का समय लगता है।
·      इस आकाशगंगा का इतना अधिक विस्तार है कि इनकी दूरी को किलोमीटर या मील में बताना एक कठिन कार्य है इसलिए इसे प्रकाशवर्ष में मापा जाता है। प्रकाशवर्ष से तात्पर्य है प्रकाश के वेग का पैमाना।
·      सूर्य तथा पृथ्वी के बीच की दूरी 15 करोड़ किलोमीटर है। प्रकाश की किरण 1 सेकंड में 300000 किलोमीटर की दूरी तय करती है। इस आधार पर कहां जा सकता है कि सूर्य के प्रकाश को सूर्य से पृथ्वी तक की दूरी तय करने में 8 सेकंड का समय लगता है।
·      एक प्रकाशवर्ष 94, 63, 00, 00, 00, 000 किलोमीटर के बराबर होता है।
·      हमारे आकाशगंगा का व्यास 1,00,000 प्रकाश वर्ष है।
आकाश गंगा 

सूर्य
·       सूर्य आकाशगंगा का एक सामान्य तारा है। अपने ग्रहों तथा उपग्रहों को साथ लेकर प्रतिसेकंड 220 किलोमीटर के वेग से यह आकाशगंगा की परिक्रमा करता है। आकाशगंगा की परिक्रमा पूरी करने में इसे 25 करोड़ वर्ष लगते हैं।
·       नौ/आठ ग्रह इसके अंडाकार पथ पर परिक्रमा करते हैं।
·       पृथ्वी से यह 109 गुणा बड़ा तथा 3,30,000 गुणा भारी है। यह इतना बड़ा है कि पृथ्वी जैसे 13,00,000 पिंड इसमें समा सकते हैं।  
·       पृथ्वी से सूर्य की दूरी 14, 90, 00, 000 किलोमीटर है।
·       सूर्य के किरण को इतनी दूरी तय करने में 8 मिनट का समय लगता है।
·       सौर परिवार में 9 ग्रह, लगभग 60 उपग्रह, हजारों क्षुद्र ग्रह, धूमकेतु, उल्काएँ आदि शामिल हैं।
·       सूर्य के सतह का तापमान 60000 – 1,50,00,0000 सेंटीग्रेड है। 

सूर्य 


ग्रह
बुध
·       सूर्य के सबसे नजदीक स्थित ग्रह है।
·       इसका व्यास 4,850 किलोमीटर है।
·       59 दिनों में यह अपने अक्ष पर एक बार घूम जाती है।
·       88 दिनों में ही यह सूर्य की परिक्रमा पूर्ण करता है।
·       दिन में इसका तापमान 4000 सेंटीग्रेड तथा रात में 00 से भी कम होता है। इसलिए यहाँ जीवों का अस्तित्व नहीं है। 
·       इसका कोई उपग्रह नहीं है।

 
बुध ग्रह 

शुक्र
·       चंद्रमा के बाद शुक्र ही सबसे चमकीला पिंड है।
·       पृथ्वी के सबसे नजदीक स्थित ग्रह है।
·       इसे भोर/सायंकाल का तारा भी कहा जाता है। हालांकि यह तारा नहीं बल्कि ग्रह है।
·       225 दिनों में सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करता है।
·       इसका व्यास 12,228 किलोमीटर है।
·       इसके सतह का तापमान 4000 सेंटीग्रेड से भी अधिक रहता है।
·       अपनी धूरी पर पूर्व से पश्चिम दिशा में घूमता है।
·       बुद्ध के समान शुक्र ग्रह का भी कोई उपग्रह नहीं है।
शुक्र ग्रह 

पृथ्वी
·      यह प्रति सेकंड 29.76 किलोमीटर की गति से 365 दिन में सूर्य का एक चक्कर लगाती है।
·      यह 23 घंटे 56 मिनट 24 सेकंड में अपनी धूरी पर एक बार घूम जाती है।
·      सौर मंडल का एकमात्र ग्रह है जहां जीवन है।
·      इसे नीला ग्रह कहा जाता है।
पृथ्वी 
 
मंगल
·      इसे लाल ग्रह कहा जाता है।
·      687 दिनों में सूर्य की परिक्रमा पूरा करता है।
·      इसके दो उपग्रह हैं।
 
मंगल ग्रह 

बृहस्पति
·      यह सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह है।
·      यह पृथ्वी से 1300 गुणा बड़ा है।
·      सूर्य की परिक्रमा पूरी करने में इसे 12 वर्ष लगते हैं।
·      अपनी धूरी पर घूमने में इसे 10 घंटे लगते हैं।
·      इसके उपग्रहों की संख्या 16 है।
·      इसे सौर मंडल का दूसरा सूर्य भी कहा जाता है।
·      इसके सतह को अभी तक देखा नहीं जा सका है। क्योंकि सतह से ऊपर हाइड्रोजन, मिथेन, अमोनिया जैसी जहरीली गैसों से निर्मित हजारों किलोमीटर का वायुमंडलीय परत है।
·      गैनीमिडे उपग्रह सौरमंडल का सबसे बड़ा उपग्रह है।
 
बृहस्पति 

शनि
·      बृहस्पति के बाद सौर मंडल का यह दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है।
·      इसके चारों ओर 7 वलय हैं।
·      इसके उपग्रहों की संख्या 17 है।
·      सूर्य की परिक्रमा पूर्ण करने में 30 वर्ष का समय लगाता है।
·      सूर्य से अत्यधिक दूर होने के कारण यह एक ठंढा ग्रह है।
 
शनि 

यूरेनस (अरुण)
·      बृहस्पति तथा शनि के बाद यह सौर मंडल का तीसरा सबसे बड़ा ग्रह है।
·      1781 ई. में विलियम हर्षल ने अत्याधुनिक व बड़े दूरबीन की सहायता से इस ग्रह की खोज की। उन्होंने इसे यूरेनस नाम दिया।
·      84 वर्षों में सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करता है।
·      11 घंटों में अपनी धूरी पर एक बार घूम जाता है।
·      मिथेन तथा हाइड्रोजन गैस से निर्मित घने वायुमंडल के कारण इसकी सतह देखी नहीं जा सकती।।
·      इसके उपग्रहों की संख्या 15 है।
 
यूरेनस 
नेपच्यून (वरुण)
·      इस ग्रह की खोज 1846 ई. में हुई थी, इसे खोजने का श्रेय फ्रांस के खगोलविद लवेरिए को जाता है।
·      रोमन सागर के देवता के नाम पर इसे नेपच्यून नाम दिया गया। चुकी हमारे देश में वरुण को सागर का देवता माना जाता है, इसलिए हमारे देश में इसे वरुण के नाम से भी जानते हैं।  
·      इसका व्यास 45, 000 किलोमीटर है।
·      165 वर्षों में सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करता है।
·      15 घंटे 48 मिनट में अपने अक्ष पर एक चक्कर लगाती है।
·      इसका वायुमंडल भी यूरेनस की तरह मिथेन तथा हाइड्रोजन जैसी जहरीली गैसों से बना है।
·      इसके उपग्रहों की संख्या 8 है।
 
नेपच्यून 
उपग्रह व अन्य खगोलीय पिंड
चंद्रमा
·      यह पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह है।
·      पृथ्वी के सबसे नजदीक स्थित खगोलीय पिंड है।
·      यह एक किलोमीटर प्रति सेकंड के वेग से 27 दिन, 7 घंटे, 43 मिनट, 11 सेकंड में पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरी करता है।
·      27 दिन, 7 घंटे, 43 मिनट, 11 सेकंड समय में ही यह अपने अक्ष पर एक बार घूम जाता है।
·      चंद्रमा का एक गोलार्द्ध ही पृथ्वी की ओर रहता है। दूसरा गोलार्द्ध कभी दिखाई नहीं देता।
·      दिन के समय यहाँ का तापमान 1300 सेंटीग्रेड जबकि रात में -1500 चला जाता है।
चंद्रमा 



धूमकेतु
·      इसे कॉमेट (लंबे बालों वाला) या पुच्छल तारा भी कहते हैं।
·      एडमंड हेली ने इसका पता लगाया।
·      ग्रहों की तरह धूमकेतु भी सौर मंडल के सदस्य हैं जो सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
·      इसके तीन भाग होते हैं – नाभिक, सिर तथा पूंछ। नाभिक का व्यास आधे किलोमीटर से लेकर 50 किलोमीटर तक हो सकता है। धूमकेतु के ये नाभिक बर्फ बनी गैसों तथा अन्य पदार्थों के मेल से बनी होती है। धूमकेतु जब सूर्य के नजदीक पहुंचता है तो सूर्य के ताप से यह गर्म हो जाता है और इसकी बर्फीली गैसें तथा धूलकण बाहर निकलते हैं। इससे सूर्य के सामने नाभिक की गैसें फैलकर चमकने लगती है और इस प्रकार धूमकेतु का सिर बनता है।
·      धूमकेतु के नाभिक से निकली गैसें सौर – वायु अथवा विकिरण के दाब से बहुत दूर तक फैलकर चमकने लगती है, इसे धूमकेतु की पूंछ कहते हैं। यह पूंछ 20 करोड़ किलोमीटर तक फैल जाती है।  
·      यह 76 वर्षों में पृथ्वी के नजदीक आती है।
धूमकेतु 

उल्काएँ
·      आकाश में दिखनेवाले टूटते तारों को उल्काएँ कहते हैं।
·      यह विखंडित धूमकेतु के कण होते हैं।
·      अधिकांश उल्काएँ मूंग के दाने से भी छोटी होती है।
·      ये उल्काएँ जब वायुमंडल में पहुँचती हैं तो वायुमंडल के अणुओं के साथ इनका घर्षण होता है। इस घर्षण से भाप बनता है जो टूटते तारे के रूप में चमकने लगते हैं।
·      ये उल्कापिंड लोहे तथा पत्थर के बने होते हैं।
उल्काएँ 


क्षुद्र ग्रह
·      मंगल तथा बृहस्पति के बीच 2000 से भी अधिक क्षुद्र ग्रह हैं जो सूर्य की परिक्रमा करते हैं। चुकी इनके आकार काफी छोटे हैं तथा ये किसी ग्रह की नहीं बल्कि सूर्य की परिक्रमा करते हैं इसलिए इन्हें बौने ग्रह, लघु ग्रह या क्षुद्र ग्रह कहा जाता है।
·      एक अनुमान के अनुसार क्षुद्र ग्रहों की संख्या लाखों में है।
·      सबसे बड़ा क्षुद्र ग्रह सीरेस है जिसका व्यास 768 किलोमीटर है।
·      हजारों क्षुद्र ग्रह ऐसे हैं जिन का व्यास 1 से 100 किलोमीटर है।
क्षुद्र ग्रह 


प्लूटो (यम)
·       टोम्बो नामक अमेरिकी खगोलशास्त्री ने 1930 ई. में एक ग्रह की खोज की, जिसे प्लूटो नाम दिया।
·       यह सूर्य से काफी दूर था जहां सूर्य की रौशनी कम पहुँचती थी। इस आधार पर यूनानी यमलोक के देवता के नाम पर इसे प्लूटो नाम से संबोधित किया गया। इसी आधार पर प्लूटो को हमारे देश में यम के नाम से भी संबोधित किया जाता है।  वास्तविकता यह है कि पूर्णिमा के दिन चंद्रमा से जितनी रौशनी हमें मिलती है इसका 275 गुना तेज रौशनी प्लूटो को सूर्य से मिलती है।
·       इसका व्यास 5500 किलोमीटर है।
·       यह 248 वर्ष में सूर्य का एक चक्कर लगाती है।
·       अभी तक इसके एक उपग्रह खोजे जा चुके हैं।




अन्य महत्वपूर्ण जानकारियाँ
·      आकाशगंगा में लगभग 150 अरब तारे हैं, इनमें से रात्रि में आकाश में कोई व्यक्ति 3000 तारे ही देख सकता है।



*स्त्रोत - मुले, गुणाकार (2010) : सौर मंडल, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, दसवां संस्करण 

Tuesday, 2 April 2019

शनि ग्रह : परिचय


सौर मंडल के ग्रह शनि को हमारे धर्मदेश में 'शनैश्चरकहा जाता है। दरअसल यह हमारी पृथ्वी से 750 गुना बड़ा है तथा हमारी पृथ्वी से 128 करोड़ किलोमीटर दूर है। यह 30 वर्ष में सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करता है। पृथ्वी से इतनी दूर होने के कारण यह ग्रह बहुत ही धीमी गति से चलता दिखाई देता है इसलिए प्राचीन काल में लोगों ने इसे 'शनैःचरनाम दिया था। जिसका अर्थ होता है - धीमी गति से चलने वाला। 
'शनिचर' या 'शनि' इसका अपभ्रंश रूप है। पौराणिक कथाओं में इसे सूर्य का पुत्र कहा गया है। यूनानी मान्यताओं के अनुसार यह (सैटर्न) बृहस्पति (जुपिटर) का पिता है। भारतीय ज्योतिष में इसे एक अशुभ ग्रह माना गया है जबकि वास्तविकता यह है कि यह सौर मंडल का सबसे खूबसूरत ग्रह है। चुकी यह अत्यंत मंद गति से 30 वर्षों में सूर्य का एक चक्कर लगाता है इसलिए पूरे वर्ष भर भी इसकी स्थिति में कोई विशेष परिवर्तन दिखाई नहीं देता। एक राशि में यह लगभग ढाई वर्ष रहता है। 




Monday, 25 February 2019

मनवाधिकारों का हनन करने वाले अनुच्छेद 35 A में संशोधन किया जाए।


मैं अनुच्छेद 35A की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं का समर्थन करता हूं। 1947 में विभाजन के बाद कश्मीर क्षेत्र में बसे लाखों लोग, जो शरणार्थियों की चौथी और पांचवी पीढ़ी हैं, आज भी शरणार्थी के रूप में भारतीय संविधान द्वारा प्रदत मौलिक अधिकारों से वंचित हैं। हैरत की बात यह है की एक लोकतांत्रिक देश में ये लोग भारतीय नागरिक तो हैं लेकिन जम्मू कश्मीर के नागरिक नहीं हैं। इन्हें लोकसभा चुनाव में वोट देने का अधिकार तो है लेकिन अपने राज्य की विधानसभा, पंचायत या अन्य चुनाव में न वोट डालने का अधिकार है, न राज्य में सरकारी नौकरी पाने का, न ही राज्य के कॉलेजों में दाखिला लेने का अधिकार है। यह प्रावधान हमारे देश के नागरिकों के मानवाधिकार का हनन है, इसलिए भारत सरकार तथा जम्मू कश्मीर सरकार को मिलकर इसे संशोधित करना चाहिए। कम से कम इन नागरिकों, जिनकी 4-5 पीढ़ियां जम्मू कश्मीर में रही है, को वहां के नागरिक का दर्जा तो मिलना ही चाहिए।

Tuesday, 20 November 2018

"देव उठनी" त्योहार


आज छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव पूर्व संध्या पर दीपावली जैसा माहौल है। पटाखे, दीप, झालरों से पूरा शहर जगमगा रहा। अवसर है "देव उठनी" त्योहार का। बिहार में दीपावली के बाद जो महत्व छठ पूजा का है वही महत्व यहां देव उठनी का है। मान्यता है कि आषाढ़ एकादशी के दिन देव सुसुप्तावस्था में चले जाते हैं इसलिए इस दिन से शुभ काम जैसे विवाह आदि बंद हो जाते हैं। कार्तिक एकादशी के दिन "देव उठनी" त्योहार के बाद से ही सभी शुभ काम शुरू हो जाते हैं। इस दिन गन्ने से मंडप बनाकर तुलसी का शालिग्राम से विवाह कराया जाता है।

Tuesday, 6 November 2018

सरकार चलाने वाले लोग देशभक्त या धर्मभक्त ?


जेएनयू में तथाकथित देश विरोधी नारे लगने की घटना के बाद देशद्रोही, देशभक्त, राष्ट्रवाद शब्द विमर्श का मुद्दा बन गया था। जेएनयू में इन मुद्दों पर अनेकों दिन तक खुले सत्र में चर्चा आयोजित हुए जिसमें प्रोफेसर अपूर्वानंद के साथ-साथ देश भर के अकादमिक जगत के साथ-साथ सामाजिक, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने विचार प्रेषित किए। लगभग समस्त मीडिया संस्थान भी  इस विमर्श पर कई दिनों तक पैनल बनाकर चर्चा करते रहे। इन चर्चाओं में देशभक्ति के सर्टिफिकेट बांटने वाले गला फाड़-फाड़ कर चिल्लाते नज़र आए कि पाकिस्तान हमारा शत्रु है। उसके प्रति हमदर्दी दिखाने वाला भारतीय चाहे वह हिंदू, मुसलमान या किसी भी धर्म का हो, देशद्रोही है। इस दौरान कई गड़े मुर्दे भी उखड़े जिसपर जान-बूझकर विमर्श कर हिंदू मुस्लिम सांप्रदायिकता को बढ़ावा दिया गया। जैसे भारत व पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच के समय भारतीय मुसलमानों की बड़ी संख्या द्वारा पाकिस्तानी टीम को सपोर्ट करना, उनकी जीत पर पटाखे फोड़कर जश्न मनाना, शाहिद अफरीदी, शोएब अख्तर सहित अन्य पाकिस्तान के स्टार क्रिकेट खिलाड़ियों के प्रशंसक होने को मीडिया पैनलिस्ट ने देशद्रोही कार्य करार दे दिया। ऐसा कर उन पैनलिस्टों ने एक धारणा बना दी कि आपने यदि किसी भी मामले में पाकिस्तान का पक्ष लिया तो आप देशद्रोही करार दिये जाएंगे। मुसलमानों से घृणा करने वाले इन नफरत के सौदागरों ने इस्लामी झंडे को पाकिस्तानी झंडा बताकर उनके पाकिस्तानी समर्थक होने, देशद्रोही होने का काफी दुष्प्रचार किया। मेरे कहने का ये तात्पर्य नहीं है कि हमारे ही देश में रहकर हमारे ही देश के खिलाफ कोई ऐसा काम करे जिससे देश की सुरक्षा को खतरा हो, को देशद्रोही नहीं कहा जाए बल्कि मैं ज़ोर देकर कहता हूँ कि हमारे देश का कोई भी व्यक्ति चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान देश के इज्जत, प्रतिष्ठा की बेला में अपने देश भारत को छोड़कर यदि पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन, नेपाल या अन्य देशों का पक्ष ले, अपने देश की खुफिया सूचनाएँ दुश्मन देश को पहुंचाए तो बेशक उन्हें देशद्रोही कहा जाए।
          लेकिन ये नियम कानून सभी के लिए हो। किसी को कोई रियायत नहीं मिले। सरकार भी खुद इसे अमल में लाए। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ कि सरकार भी इस मुद्दे पर काफी ढुलमुल रही है। हाल ही में असम में चुनाव जीतने के बाद केंद्र व कई राज्यों की बीजेपी सरकार जिस प्रकार पाकिस्तानी, बांग्लादेशी हिंदू नागरिकों के साथ व्यवहार कर रही है, उनकी देशभक्ति पर भी प्रश्नचिन्ह उठता है। हाल ही में गृह मंत्रालय ने सिटिज़न एक्ट 2016 में संशोधन करते हुए देश के 7 राज्यों के गृह सचिवों व जिलाधिकारियों को यह शक्ति दी है कि इस एक्ट के सेक्शन 6 के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान से बिना वैध दस्तावेज़ के आए बौद्ध, ईसाई, हिंदु, जैन, पारसी आदि अल्पसंख्यक धर्मावलम्बियों को इन देशों की सीमा से लगे राज्य भारतीय नागरिकता के सर्टिफिकेट दे सकते हैं यदि वह 6 वर्ष भारत में रह चुका है। पहले यह अवधि 11 वर्ष थी, 2016 में संशोधन के बाद इसे घटाकर 6 वर्ष कर दिया गया।[i] हैरत की बात यह है कि इसमें इस्लामी धर्मावलम्बी शामिल नहीं हैं। एक तरफ केंद्र सरकार 1971 ई. के बाद भारतीय सीमा में बिना इजाजत आए बंग्लादेशी शरणार्थियों जिसमें अधिकांश मुस्लिम हैं, को घुसपैठिए, देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए भारतीय नागरिकता देने से इनकार कर असम, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों से उन्हें वापस अपने देश बांग्लादेश भेजना चाहती है तो वहीं हिंदू बांग्लादेशी शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने की बात कर रही है। इसी प्रकार राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार पाकिस्तान से आए विस्थापित हिंदू परिवारों के प्रति हमदर्दी दिखाते हुए रियायति दर पर आवासीय भूमि आवंटित करने की बात करती हैं। राजस्थान में पाकिस्तानी विस्थापितों के लिए काम करने वाली एक स्वयंसेवी संस्था सीमांत लोक संगठन के अनुसार राजस्थान में कुल 5 लाख पाकिस्तानी हिंदू विस्थापित बसे हैं।[ii] यहाँ सवाल यह उठता है कि जब बिना वैध दस्तावेज़ के साथ हमारे देश में रह रहे बांग्लादेशी यदि देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं तो इन 5 लाख हिंदू पाकिस्तानी के प्रति सरकार की सोच इतनी सकारात्मक रखते हुए उन्हें अपने देश में क्यों बसाना चाहते हैं? जबकि ये 5 लाख विस्थापित हिंदू ऐसे देश पाकिस्तान से संबंधित हैं जिन्हें हम दुश्मन देश मानते हैं। इस दृष्टि से तो इनसे देश की सुरक्षा को बांग्लादेशियों से भी अधिक खतरा है। कोई भी आतंकी हिंदू शरणार्थी बनकर पाकिस्तान के लिए नापाक हरकतों को अंजाम दे सकता है। पाकिस्तान के मुक़ाबले बांग्लादेश से तो ऐसी कोई शत्रुता ही नहीं है। एक समुदाय/धर्मावलम्बी के साथ राष्ट्रीयता के आधार पर व्यवहार, तो दूसरे के साथ धार्मिकता के आधार पर व्यवहार ! सिर्फ इसलिए कि जिसे बाहर भेजने की बात कर रहे हैं वे मुसलमान हैं जिन्हें सरकार की विचारधारा के लोग अपना शत्रु समझते हैं। और जिसको बसाने की बात कर रहे हैं वे हिंदू हैं। उनके प्रति हमदर्दी केवल इसलिए है कि दोनों का धर्म एक है।
          जब पाकिस्तानियों व बांग्लादेशियों के साथ उनकी राष्ट्रीयता नहीं बल्कि धर्म के आधार पर ही व्यवहार करना है तो फिर ये देशभक्ति का ढोंग करने का क्या मतलब??? जिन बांग्लादेशियों के प्रति आप घृणा सूचक शब्द घुसपैठिए प्रयुक्त करते हैं, यदि वह हिंदू बांग्लादेशी हो, जिस पाकिस्तानी के खिलाफ आप दिनरात जहर उगलते हैं यदि वे हिंदू पाकिस्तानी हों तो वह घुसपैठी, जासूस या आतंकी नहीं हो सकता क्या? फिर उन्हें हमारे देश में बसने की पूरी इज्जत के साथ इजाजत क्यों है? उन्हें वापस क्यों नहीं भेजा जाता।
          यदि सरकार में बैठे लोग सचमुच देशभक्त हैं तो किसी भी देश के नागरिक, चाहे वह अमेरिकी, बांग्लादेशी या पाकिस्तानी हो, उसे उसकी राष्ट्रीयता के आधार पर धार्मिकता की परवाह किए बिना उन्हें एक विदेशी के रूप में देखते हुए व्यवहार करना चाहिए। सिटीजन एक्ट 1955 में फिर से संसोधन कर यह कानून बनाया जाय कि बिना वैध दस्तावेज़ के भारत आए विदेशियों को बसने की इजाजत नहीं दी जा सकती। विशेष रूप से देश की सुरक्षा को देखते हुए पाकिस्तान के लोगों को, चाहे वह किसी भी धर्म के हों। नहीं तो सरकार में बैठे लोगों को खुल कर इस बात को स्वीकार करना चाहिए कि वह देशभक्त नहीं बल्कि देशभक्त की खाल ओढ़े हिंदू व संबंधित संप्रदाय के धर्मभक्त हैं। और इस धर्मभक्ति के लिए देशभक्ति भी कुर्बान है। वैसे आपकी इस धर्मभक्ति से एक बात तो स्पष्ट है कि पाकिस्तान या बांग्लादेश के मुसलमानों से हमदर्दी दिखाने वाले हमारे देश के मुसलमान और आपमें कोई अंतर नहीं है। दोनों को अपने धर्मावलंबी प्रिय हैं चाहे वह किसी देश के हों। इसलिए अगली बार उनके पाकिस्तानी मुस्लिमों के प्रति हमदर्दी दिखाने पर उंगली उठाने से पहले अपने गिरेबां में झांक लेना।
साकेत बिहारी
अजीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन
डी. आई. बेमेतरा (छत्तीसगढ़)



[i] http://www.prsindia.org/uploads/media/Citizenship/Citizenship%20(A)%20bill,%202016.pdf
[ii] https://aajtak.intoday.in/story/vasundhra-govt-relaxed-land-allotment-policy-now-pak-hindu-migrants-can-purchase-land-in-rajasthan-1-1034901.html?fbclid=IwAR2-98sw6X6DU2urZTrywHSVv0icQ_1FbmG2GLSsz1FVxZVYvTolWgW-r20